CBSC Board Exam 2026: 17 फरवरी से शुरुआत, जाने दोबारा परीक्षा के नए नियम और पात्रता ?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSC) की परीक्षाएं नजदीक आने के साथ ही कक्षाओं और घरों में उत्साह का माहौल छाया हुआ है। कक्षा 10 और कक्षा 12की CBSC बोर्ड परीक्षाएं 2026 में 17 फरवरी से शुरू होगी जो हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा चर्चित परीक्षा सत्रों में से एक है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार कक्षा 10 की परीक्षाएं 11 मार्च 2026 तक समाप्त होने की उम्मीद है, जबकि कक्षा 12 की परीक्षाएं 10 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी। इस वर्ष की बोर्ड परीक्षाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई नए नियम और सुधार जिनमें से कई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप लागू किये गए हैं। पहलीबार एक साथ लागू किए जा रहे हैं। जैसे- जैसे छात्र अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं, यहां परिवर्तनों उन्हें ध्यान में रखने योग्य बातों का स्पष्ट और व्यापक सारांश दिया गया है।
कक्षा 10 के लिए दो बोर्ड परीक्षाएं: पहली अनिवार्य है, दूसरी केवल सुधार के लिए है?
इस वर्ष का सबसे बड़ा सुधार कक्षा 10 के लिए दो बोर्ड परीक्षा प्रणाली है।
सीबीएसई द्वारा आयोजित परीक्षाएं:
• पहली बोर्ड परीक्षा: 17 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक।
• दूसरी बोर्ड परीक्षा: 15 मई से 1 जून 2026 तक।
दोनों परीक्षाएं एक ही पाठ्यक्रमपर आयोजित की जाएगी। सीबीएसई की परीक्षा नियंत्रक समय भारद्वाज ने बार - बार एक महत्वपूर्ण संदेश दोहराया है सभी छात्रों के लिए पहली बोर्ड परीक्षा अनिवार्य है।
दूसरी परीक्षा वैकल्पिक है, जिसका उद्देश्य केवल अंकों में सुधार करना है, न कि कोई बैकअप प्लान। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे फ़रवरी में होने वाली परीक्षा के लिए गंभीरता से तैयारी करें और यह न सोचे कि, मई में वे सबकुछ ठीक कर लेंगे। अंतिम परिणाम के लिए दोनों प्रयासों में से बेहतर अंक को ही माना जाएगा।
कितने विषयों की परीक्षा दोबारा दी जा सकती है?
नई प्रणाली के तहत, छात्र दूसरी बोर्ड परीक्षा में अधिकतम तीन विषयों में सुधार के लिए उपस्थित हो सकते हैं। यह विकल्प सभी विषयों में लचीला है, लेकिन इसकी एक सीमा है छात्र सभी प्रश्नपत्रों को दोबारा नहीं दे सकते। सीबीएसई ने अभिभावकों को भी यह भी चेतावनी दी है कि, यदि सुधार की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है तो बच्चों पर दूसरी परीक्षा में बैठने के लिए अनावश्यक दबाव न डालें।
विफलता, विभाजन और पात्रता नियमों की व्याख्या?
सीबीएसई ने स्पष्ट रूप से बताया है कि, यदि पहले प्रयास में चीजें योजना अनुसार नहीं होती है तो क्या होगा:
• एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों को कंपार्टमेंट श्रेणी में रखा जाएगा। और उन्हें दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।
• यदि छात्र तीन या अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण हो जाते हैं या परीक्षा में उपस्थित नहीं होते हैं, तो उन्हें दूसरी परीक्षा नहीं दी जाएगी और उन्हें 2027 की परीक्षाओं तक इंतज़ार करना होगा।
ये नियम अनिवार्य पुनः परीक्षा श्रेणी में रखे गए छात्रों पर भी लागू होते हैं, जिनके लिए पात्रता और प्रगति को और भी सख्ती से नियंत्रित किया जाता है।
आंतरिक मूल्यांकनः अब यह महज एक बार की औपचारिकता नहीं रह गई है?
इन बदलावों में, शायद सबसे महत्वपूर्ण लेकिन सबसे आसानी से नजर अंदाज किए जाने वाले बदलाव आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े है। आंतरिक मूल्यांकन को अब एक सतत दो वर्षीय प्रक्रिया माना जाता है, न कि परिक्षा के समय की जाने वाली एक बार की गतिविधि। यह बोर्ड परीक्षाओं में उपस्थित और पात्रता से सख्ती से जुड़ा हुआ है।
हालांकि कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षाओं के लिए न्यूनतम 75% उपस्थित का पारंपरिक नियम अभी भी मान्य है। सीबीएसई द्वारा कड़ी निगरानी के चलते स्कूलों में आंतरिक मूल्यांकन से संबंधित मामलों में सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
उत्तर लेखन नियम: अनुभागों का ध्यानपूर्वक पालन करें?
इस वर्ष लागू किया गया एक और महत्वपूर्ण बदलाव उत्तर पुस्तिका में लिखने से संबंधित है। विशेष रूप से कक्षा 10 के विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में। प्रश्नपत्र सामान्यतः विशिष्ट अनुभागों में व्यवस्थित होते है, जैसे: विज्ञान में: भौतिक विज्ञान,रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, सामाजिक विज्ञान में: इतिहास, नागरिक शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र। छात्रों को निर्देशानुसार अनुभागवार उत्तर लिखने होगें। अन्यथा जैसे विभिन्न अनुभागों के उत्तरों को मिला देना या गलत स्थान पर लिखना, सही उत्तर होने पर भी अंक काटे जा सकते हैं। यह एक ऐसा नियम है जिसका छात्रों को परीक्षा के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए क्यों कि उस समय का दबाव अधिक होता है।
निजी उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट?
इस वर्ष एक महत्वपूर्ण बदलाव निजी उम्मीदवारों (जो सीबीएसई से सम्बद्ध नियमित विद्यालयों में नामांकित नहीं है)को प्रभावित करता है। 2026 से बोर्ड परीक्षा के लिए, निजी उम्मीदवारों को अतिरिक्त विषयों के लिए पंजीकरण करने की अनुमति नहीं होगी। वे केवल उन्हीं विषयों की परीक्षा देने के पात्र होगें जिनके लिए वे सीबीएसई बोर्ड के मानदंडों के अनुसार पहले से पंजीकृत हैं। इस उपाय का उद्देश्य विषयों के लिए पंजीकरण पक्रिया को सरल बनाना और नियमित विद्यालय के आवेदकों के साथ समानता सुनिश्चित करना है।
स्कूलों और विषय पेशकशों के लिए स्पष्ट नियम?
सीबीएसई ने विद्यालयों को निम्नलिखित विषयों पर भी अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं।
• विषयों की उपलब्धता।
• बुनियादी ढांचा और प्रयोगशालाएं।
• प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की उपस्थिति।
विद्यालयों को उचित अनुमोदन के बिना विषय पढ़ाने से मना किया गया है। बोर्ड परीक्षाओं और परिणामों के दौरान छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए विषयों के चयन संबंधी मापदंडों की कड़ी निगरानी की जा रही है।
सीबीएसई ये बदलाव क्यों कर रहा है?
ये सभी सुधार सीबीएसई की उस पहल का परिणाम है जिसके तहत उसने अपनी मूल्यांकन प्रणाली को एनईपी 2020 के अनुरूप ढालने का प्रयास किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य है:
• एक बार में होने वाली, उच्च - दाव वाली परीक्षाओं के दबाव को कम करना।
• सतत मूल्यांकन को प्रोत्साहित करना।
• शैक्षणिक मानकों से समझौता किए बिना लचीलापन प्रदान करना।
परीक्षा शुरू होने से पहले अंतिम बात?
17 फरवरी से परिक्षाएं शुरू हो रही है, छात्रों के लिए मुख्य संदेश यही है: नियमों को समझें निर्देशों का ध्यानपूर्वक पालन करें और पहली परीक्षा को गंभीरता से लें। ऐसे समय में जब नीतियां तैयारी जितनी ही महत्वपूर्ण है, स्पष्टता छात्रों के लिए सबसे बड़ा लाभ साबित हो सकती है। और बोर्ड परीक्षाओं की बात करे तो, नियमों को सही ढंग से समझना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सही उत्तर देना।
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